प्यार वाली शायरी : मुझको तेरी ही आदत होगी

तेरे बाद भी मुझको तेरी ही आदत होगी ये मुसीबत भी मेरे सर पे मुसल्लत होगी

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देखता हूँ बच्चों को तो मुझे दुख होता है आखिर एक रोज , इनको भी मुहब्बत होगी

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सिर्फ टूट हुआ होता तो मुमकिन था इलाज मर चुके दिल की भला कैसे मरहम्मत होगी

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मैं तुझे छोड़ के दुनियाँ से चल जाऊंगा फिर देखना तुझको अपने आप से भी नफरत होगी

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सोचता हूँ उसको किसी और के साथ जब खुश देखूँगा उस रोज़ मुझको कितनी तकलीफ होगी

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तेरे बाद भी मुझको तेरी ही आदत होगी ये मुसीबत भी मेरे सर पे मुसल्लत होगी

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