प्यार वाली शायरी : दूरियों मे गुजर गई जिंदगी

यूँही दूरियों मे गुजर गई जिंदगी कभी वो जुदा, कभी मैं जुदा

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इन चाहतों के मोड पर कभी वो रुकी, कभी मैं रुका

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वही रास्ते वही मंजिलें ना उसे खबर ना मुझे पता

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अपनी अपनी अन्हा (ego) की आग मे कभी वो जली, कभी मैं जला

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ये कुदरतों का अजीब खेल था ना वो मुझे मिली, ना मैं उसे मिला

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ना वो बेवफा, ना मैं बेवफा या खुदा ये कैसा इंसाफ हुआ ना वो मुझे मिली, ना मैं उसे मिला

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